आत्मसाक्षात्कार इक शब्द नहीं बल्कि मनुष्य मात्र के जीबन  की बह सर्वोच्य अवस्था है .इक विलक्षण घटना है ,इक रूपांतरण है इक स्थाई परिबर्तन है,आनंद का कभी ना रुकने वाला इक सहज प्रवाह है और बडे से बड़े संकट में भी अबिचिलित रहकर आनन्दित रह कर जीने की कला है .म्रत्यु  के क्षणों में भी म्रत्यु को स्वागत पूर्वक  लेकर होश पूर्वक अस्तित्व में सदा के लिए बिलीन होने की कला है . आत्मसाक्षात्कार कोई आत्महत्या नहीं और ना ही इसके वाद कोई अकाल म्रत्यु  होती है ना ही आत्मसाक्षात्कार के वाद किसी प्रकार का जीबन में कोई अजूबा व्यबहार होता है .बल्कि साक्षात्कारी सामान्य आदमी से अच्छा ,मजेदार और आत्मशान्ति पुर्बक जीता, उसका प्रेम सच्चा ,उसका काम अच्छा ,समाज में उसका मार्गदर्शन सटीक ,उसकी समझ वहुत पैनी हो जाती है उसका समाधान उसकी प्रज्ञा  से आता है ,बुद्धि के पार से आता है ,बाह जीते जी सारे द्वंदो और जन्म मरण से मुक्त हो जाता है ,

यदि कोई साधक मात्र साक्षी का ध्यान करता है तो इस ध्यान मात्र से वह अनेको ऐसे लाभ प्राप्त करता है जो उसे करोडो रूपये खर्च करने पर भी नहीं मिल सकते है . जैसे कि उसे शान्ती मिलती है ,उसके मानसिक तनाब दूर होने लगते है ,डिप्रेसन से होने वाली मानसिक बीमारियाँ नहीं होती उसमे निर्भयता आती है उसका क्रोध मिटने लगता है ,उसकी ऊर्जा बर्वाद होने से बचती है तो शरीर के अंगों के रखरखाब में काम आती है ,रोग मुक्ती होती है ,रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है , कार्य  क्षमता बढ़ती है ,घर ग्रहस्थी परिवार में शुख शान्ती आती है , शरीर शक्ती शाली होता है घर में पैसा आता है क्यों कि फिजूलखर्ची अपने आप बंद हो जाती है ,काम  अच्छे से होते है,दाम्पत्य जीबन भी पहले से जादा प्रेमपूर्ण और सुखी हो जाता है  ,अकाल म्रत्यु नहीं होती ,निराशा नहीं आती ,नकारात्मकता नहीं आती ,आत्महत्या नहीं करसकता ,कोई अपराध नहीं करसकता शांत आदमी ,अनिद्रा से मुक्ती मिलती है ,धेर्यपूर्वक जीने की कला आती है अब्बल दर्जे का शारीरिक मानसिक स्वस्थ्य का समन्वय आता है .......केबल साक्षी का ध्यान करने मात्र से ,,,,,अब आगे की तो वात ही निराली है आगे के लाभ तो अकथनीय है 

ध्यान लगता है तो मानो निर्बिक्ल्प समाधी और कबीर साहेब ने जो सहज स्नाधी बताई है इक साथ लगती है ,सारे कार्यों में ध्यान इकसा बना रहता है ओष् साधने लगता है 

भान आता हा तो मानो अपने अंदर मोजूद अस्तित्व का प्रकाश आने लगता है जैसे सूरज उदय होने से पहिले की अवस्था 

जागरण आता है तो आत्मसाक्षात्कार हो गया 

परम जागरण में आपके अचेतन में जमे करोडो जन्मो के संस्कार सदा के लिए भस्मीभूत हो जाते है ''ज्ञानाग्नि दग्ध कर्माणि' गीता का वचन है 

साक्षी ,ध्यान भान ,जागरण ,परम जागरण बस ये पांच कदन चलना है aapko

क्या आप जानते हे की, इस सम्पूर्ण मानव जीवन से आप क्या प्राप्त करेंगे ?

यदि आपने जीतेजी आपने अंदर मोजूद परमात्मा आत्म् स्वरुप को नहीं जाना तो आपका जीबन बेकार गाय आपने कुछ भी नहीं पाया ,क्योकि मौत आपसे सारा कुछ छीन लेगी ,आपकी अतृपत  बासना आपको जाने किस  जन्म मे धेकेल  देगी आप अचेत होकर चले जायेगे |परन्तु आप जिज्ञासु है ,मुक्ती पाना चाहते है मुमुक्षु है ,परमात्मा से मिलना चाहते है तो हम आपकी मदद करेगे ,क्योकि परमात्मा से मिलने की चाहत सिर्फ वासतविक परमात्मा से एकाकार होकर ही तृप्त हो सकती है | जैसे प्लास्टिक के भोजन से भूख नहीं मिट सकती, आप प्लास्टिक की गुड़िया से वास्तविक प्रेम नहीं कर सकते,ऐसे ही किताबे पढ़ने, धार्मिक प्रवचन सुनने, मंत्रजाप करने, ध्यान करने के बाद भी आप का ह्रदय खाली ही रह जाता है, ऐसा क्यों ?यह मानव जीवन सिर्फ संसार में सुख लेने के लिए नहीं अपितु परमात्मा से एकाकार होने के लिए मिला है |हम आपके लिए लाए है इक गोपनीय साधना पद्दती जो सहज ,सरल,अनूठी,है जिसका संकेत सारे धर्म ग्रंथो, सन्तो की वाणियो मे आया है |इसके थोड़े से अभ्यास से  आप तनाब मुक्त होकर शांती से  जी सकते है फलत: आप उच्य रक्तचाप ,निम्न रक्तचाप ,ह्रदयाघात,ब्रेन हेमरेज जेसी  अनेक घातक बीमारियों से बच सकते है |

  आपका स्वरुप अजर,अमर अबिनाशी तथा सनातन है ,सनातन का अर्थ है   जिसे किसी भी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता और जो जीवित प्राणियों एवं पदार्थ में उपस्थित है|सारे शरीरों मे सना है ओतप्रोतहै , महँ संत कहते हे जो ना कभी जन्मा हे और ना कभी मरेगा, परन्तु अस्तित्व को परिभाषित नहीं किया जा सकता|

क्या आप जनत है आप इस  जन्म से पहले कहा थे और म्रत्यु के बाद कहा जायेंगे ?

म्रत्यु के भय के कारण यह प्रश्न खड़ा होता है की इस मानव जीवन में हम क्यों आये है ?

                         इस संसार की सफलता, मान सम्मान, धन,पद,प्रतिष्ठा सब कुछ प्राप्त करने के बाद भी मानव अतृप्त है | तृप्ति तो केवल सदगुरु के सानिध्य से ही प्राप्त हो सकती है |
  क्यों आदमी बेकार के तनाबो चिन्ताओ के कारण अनाब्श्यक बीमारियों से (डायबिटीस ,रक्तचाप,ह्रदयाघात,दिमाककी नस फटने के कारण )अकाल मौत मर रहा है ,हम आपको इन खतरों से वचायेगे,आपका जीबन सुखमय खुशहाल बनाकर आपको मंब जीबन का सर्बोच्च शिखर आत्मदर्शन करा कर जीबन मुक्त महापुरुषों की श्रेणी मे खड़ा करेगे आप इस जीबन मे अपनी आयु पूरीतरह जीकर ,और अंतमे परमात्मा की ज्योति मे लींन हो सकेगे यानि जीतेजी परमात्मा मे और शरीर छूटने पर भी परमात्मा मे ,हर तरह से आपकी जीत |
  इस विश्वविद्यालय में आप सदगुरु श्री स्वामी सच्चिदानंदजी परमहंस की ब्यक्तिगत मदद  ,मार्गदर्शन एवं  दिव्य सानिध्य प्राप्त कर सकेंगे| गुरुदेव के पास साधना की वो अद्वितीय पद्धति है जिससे आप का मानव जीवन सार्थक हो जायेगा |समय - समय पर उनके लेख एवं विडिओ शिष्यों एवं अनुयायियो के लिए उपलब्ध हो सकेंगे | सदगुरु परमात्मा के दूत के रूप में आपके द्वार पर दस्तक दे रहे है, जाग सको तो जागो | 
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